🔥 बिरसा मुंडा की जीवनी: झारखंड के अनमोल वीर, जिन्होंने सत्ता के छक्के छुड़ा दिए! 🔥
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🟠 परिचय:
बिरसा मुंडा (1875–1900) झारखंड के महान स्वतंत्रता सेनानी और आदिवासी नेता थे, जिन्होंने ज़मीनदारों और सत्ता के झूठे कानूनों के खिलाफ अपने लोगों को एकजुट किया। उन्हें झारखंड का सच्चा योद्धा माना जाता है।
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🔶 जन्म और प्रारंभिक जीवन:
बिरसा का जन्म 15 नवंबर 1875 को झारखंड के उलीहातू गांव में हुआ। बचपन से ही उनका दिल अपने जनजाति के अधिकारों और जंगलों के लिए धड़कता था।
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🔷 सत्ता को छक्के छुड़ाने वाला संघर्ष:
बिरसा मुंडा ने 1899 में ‘उलगुलान’ नामक महान बगावत की शुरुआत की। यह विद्रोह सत्ता के खिलाफ खून में खौल पैदा करने वाला था।
ज़मीनदारों और अन्य शोषकों के झूठे कानूनों को उन्होंने अपनी ताकत से कुचल दिया।
उन्होंने आदिवासियों को न केवल अपने हक़ के लिए लड़ना सिखाया, बल्कि सत्ता को ऐसी करारी चोट दी कि वे दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो गए।
उनके नेतृत्व में हजारों आदिवासी एक जुट हुए और ‘जंगलों के भगवान’ ने सत्ता के छक्के छुड़ा दिए।
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🟢 क्या आप जानते हैं?
बिरसा मुंडा ने ‘सरना धर्म’ की नींव रखी, जो प्रकृति पूजा का आधार है।
उन्होंने महिलाओं के अधिकारों के लिए भी आवाज़ उठाई।
सत्ता के दबाव के बावजूद उनकी छवि आदिवासियों के दिलों में अमर हो गई।
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🔵 विरासत और महत्व:
बिरसा मुंडा ने झारखंड की मिट्टी में आज़ादी की मशाल जलाई, जो आज भी हर आदिवासी के दिल में जलती है। उनकी बहादुरी और जुझारूपन से शोषक हिल गए। झारखंड के लोगों के लिए वे एक जीवंत प्रतीक हैं।
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✨ बिरसा मुंडा: वह आदिवासी यो
द्धा जिसने सत्ता को उनके घर में घुसकर सबक सिखाया! ✨
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